सच्ची सफलता हेतु कुछ अनिवार्य शर्तें

March 2001

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सफलता मात्र संयोग का नाम नहीं है। यह दृष्टिकोण का परिणाम है। नीतिपूर्वक चलकर ही सच्ची सफलता अर्जित की जा सकती है। इस राह पर प्राप्त असफलता भी उतनी ही श्रेष्ठ एवं वरेण्य है। सफलता एक अनुभव है। सफलता कोई रहस्य नहीं, वरन् कुछ बुनियादी नियमों का सतत पालन करने का सुखद परिणाम है। इसके विपरीत असफलता कुछ गलतियों को लगातार दुहराने का नतीजा है।

अर्ल नाइटिंगेल के अनुसार, “मूल्यवान् लक्ष्य की लगातार प्राप्ति का नाम ही सफलता है।” सफलता सतत प्रयास का नाम है। सफलता एक सफर है, मंजिल नहीं। मंजिल या लक्ष्यप्राप्ति के पश्चात् ठहर जाना सफलता का अंत है। लक्ष्य मिलने पर एक सुखद अनुभव होता है। सफलता इसी अनुभूति का विषय है। इसे अंदर अहसास किया जा सकता है। सफलता का सफर लक्ष्य की मूल्यता के महत्त्व पर निर्भर करता है। यदि लक्ष्य उत्कृष्ट एवं ऊँचा है, तो सफलता भी उतनी ही महान् एवं पावन होगी। यही सफलता की कहानी है, परंतु यह कहानी पूर्णता और संतोष के बिना अधूरी है।

श्रेष्ठता का प्रयास ही सफलता है। संसार में ऐसा कुछ भी नहीं है, जिसे सुधारा या सुगढ़ नहीं बनाया जा सकता। पूर्णता की प्राप्ति एक असंभव तो नहीं, हाँ, दुष्कर लक्ष्य हो सकता है। परंतु श्रेष्ठता पाई जा सकती है। श्रेष्ठता में सफलता समाहित है। इस प्रयास हेतु संघर्ष की आवश्यकता पड़ती है। सफलता संघर्ष के बिना नहीं मिल सकती। बिना संघर्ष कठिनाइयों से जूझने की कला सिखाता है। आत्मविश्वास तभी जग सकता है, जब मुसीबतों व कठिनाइयों का सामना किया जाता है, उनको जीता जाता है। कष्ट-कठिनाइयाँ जीवन का अपरिहार्य अंग हैं। इनसे जूझना ही संघर्ष है। विजेता कभी मायूस एवं निराश नहीं होता। वह संघर्षरत रहता है। संघर्ष ही सफलता है। हर चीज आसान होने से पहले कठिन होती है। कठिनाइयों से नहीं भागना चाहिए। इसलिए कहा गया है, “शाँत समुद्र में नाविक कभी कुशल नहीं बन पाता।”

सच्ची सफलता का मापदंड है उचित कार्य को उचित ढंग से पूर्ण करना और अपने लक्ष्य को प्राप्त करना। जीवन में सफलता इस बात से नहीं मापी जाती कि दूसरों की तुलना में हम क्या कर रहे हैं। हमारी सफलता तो इस तथ्य पर आधारित है कि हम अपनी क्षमताओं की तुलना में क्या कर रहे हैं। सफल व्यक्ति स्वयं से लड़ा करते हैं। वे अपने ही कार्यों में सदैव सुधार लाते हैं और प्रगति करते हैं। सफलता का मानदंड प्राप्त ऊँचाई नहीं हो सकती, वरन् यह इस बात से तय होता है कि हम गिरकर कितनी बार उठते हैं। गिरकर बार-बार उठने की शक्ति ही सफलता का पथ प्रशस्त करती है।

सफलता का पथ दुष्कर नहीं तो सरल भी नहीं है। इस पथ पर अनेक मुसीबतें आती हैं। ये मुसीबतें हैं, अहंकार, सफलता-असफलता का डर, योजना की कमी, लक्ष्य का अभाव, जिंदगी का बदलाव, विश्वास की कमी, आर्थिक असुरक्षा, असह्य पारिवारिक दायित्व, दिशाहीनता, अकेलेपन का अहसास, सारा बोझ स्वयं उठाना, क्षमता से अधिक स्वयं को बाँधना, प्रशिक्षण, दृढ़ता व प्राथमिकता की कमी। इन कठिनाइयों को पार करके ही सफलता का सेहरा सिर पर बँधता है।

सफलता के लिए आवश्यक है दृढ़ मनःस्थिति की। किसी स्थिति में हम अपने आपको कैसे सँभालते और ढालते हैं, उसी से हमारी सफलता तय होती है। असफल दो प्रकार के होते हैं, वे जो करते तो हैं, परंतु सोचते नहीं। दूसरे वे जो सोचते तो हैं, परंतु कुछ करते नहीं। सोचने-विचारने की क्षमता का प्रयोग किए बिना जीवन जीना ठीक उसी तरह है जैसे बिना निशाने के तीर चलाना।

सफल नहीं हो पाने के कई कारण हैं। चुनौती स्वीकारने में झिझक भी एक वजह है। जीवन में खतरे भी आते हैं, उनसे डरना सफलता के लिए घातक है। खतरा उठाने वाले सदैव सतर्क व सजग होते हैं और असफलता उनके पास नहीं फटकती। सतत प्रयास-पुरुषार्थ के अभाव से असफलता हाथ लगती है। जब कठिनाइयाँ भारी पड़ती हैं, तो पलायन सबसे आसान तरीका नजर आता है। विजेता बारंबार असफलता के बावजूद हार नहीं मानता। अधिकतर लोग ज्ञान और प्रतिभा की कमी से नहीं हारते, बल्कि वे इसलिए हार जाते हैं कि क्योंकि वे भाग खड़े होते हैं। सफलता का रहस्य है सतत कोशिश और विरोध। राल्फवाल्डो इमर्सन के शब्दों में कहें तो कोई व्यक्ति इसलिए नायक नहीं होता कि वह किसी और से ज्यादा बहादुर है, वरन् दूसरों की तुलना में दस मिनट ज्यादा दिखाता है।

असफलता के कारणों में आते हैं, तुरंत इच्छापूर्ति, प्राथमिकताओं की कमी, कामचोरी, स्वार्थ और लालच। लालच का अंत नहीं है। स्वाभिमान की कमी से लालच पैदा होता है। लालच झूठा अहंकार, आडंबर, दिखावा, प्रदर्शन या बराबरी की आदत के रूप में दिखाई देता है। स्वार्थी और लालची व्यक्तियों के जीवन में सच्ची सफलता कभी नहीं आ सकती। विश्वास का अभाव भी असफलता का एक कारण है। यह साहस और आत्मविश्वास की कमी द्योतक है। ऐसे लोग दूसरों की स्वीकृति पाने के लिए दूसरों के साथ चलते हैं। वे दूसरों की नजर में अच्छा रहने के लिए जान-बूझकर गलत काम करते रहने को मजबूर होते हैं। दृढ़ विश्वास आस्था से उपजता है। आस्था के बिना सभी कार्य दिवास्वप्न के समान होते हैं। आस्था चमत्कार का इंतजार नहीं करती। परंतु उसे साकार बनाती है। इसी वजह से हेनरी फोर्ड ने कहा है अगर आप सोचते हैं कि आप कर सकते हैं या आप यह सोचते हैं कि आप नहीं कर सकते, तो आप दोनों ही तरह ठीक हैं।

प्रकृति या ईश्वर के नियमों को समझने का अभाव भी असफलता का कारण बन सकता है। परिवर्तन एवं बदलाव प्रकृतिप्रदत्त नियम हैं। हर प्रगति एक बदलाव है, परंतु हर बदलाव एक प्रगति नहीं है। अतः परिवर्तन या बदलाव को जाँच-परखकर स्वीकारना चाहिए। असफलता के कारणों में योजना बनाने और तैयारी करने की अनिच्छा भी आती है। इस परिप्रेक्ष्य में विंस लिंबार्डी का कथन बड़ा ही युक्तियुक्त प्रतीत होता है। उनके अनुसार जीतने की इच्छा सभी में होती है, परंतु जीतने के लिए तैयारी करने की इच्छा बहुत कम लोगों में होती है। सफलता और असफलता के बीच वही अंतर है, जो बिलकुल सही और लगभग सही में है।

किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए पूरी तैयारी करना आवश्यक है। इसके लिए जरूरी है, उद्देश्य, सिद्धाँत, योजना, अभ्यास, सतत प्रयास, धैर्य और गर्व। इसी से पूरी तैयारी होती है। तैयारी का तात्पर्य है अपनी गलतियों से सीख लेना। किसी त्रुटि एवं भूल को सुधारने का सबसे अच्छा तरीका है, जल्दी ही गलती स्वीकारना, उस पर अड़े न रहना, उससे सीखना, उसे दुहराना नहीं और न बढ़ाना और न दूसरों पर दोषारोपण करना। बहानेबाजी, अवसरों को पहचानने में अयोग्यता, डर, अनुशासन की कमी, कमजोर स्वाभिमान, ज्ञान का अभाव, भाग्यवादी दृष्टिकोण, उद्देश्य की कमी, साहस का अभाव भी असफलता के कारणों में आते हैं। इन कारणों को दूर करके ही सफलता का सौभाग्य प्राप्त किया जा सकता है।

असफलता के गर्भ से ही सफलता रूपी शिशु का जन्म होता है। इसी वजह से टाम वैटरसन कहते हैं, “जब भी असफलता की दर दुगुनी या इससे अधिक होने लगती है, तो समझना चाहिए कि सफलता मिलने वाली है।” बस इससे जूझने हेतु साहस सँजोने की आवश्यकता भर है। सफलता की कहानियाँ बड़ी असफलता की कहानियाँ भी होती हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने असफलता के तप्त रेगिस्तान में सफलता रूपी भव्य महल खड़ा किया था। लिंकन हजार बार असफल हुए, परंतु उन्होंने हार नहीं मानी।

1913 में जी.डी. फारेस्ट ने ट्रायोड ट्यूब का आविष्कार किया। इस आविष्कार के पूर्व उन्हें बारंबार असफलता मिली और धोखाधड़ी जैसा कठोर आरोप भी लगाया गया। 10 दिसंबर 1903 के न्यूयार्क टाइम्स के संपादकीय में ‘राइट ब्रदर्स’ की समझ पर सवालिया निशान लगाया गया था। परंतु वे इस उलाहने एवं असफलता से निराश नहीं हुए थे और वायुयान की खोज की थी। 65 साल की उम्र में कर्नल सैंडर्स के पास एक पुरानी कार और सोशल सिक्यूरिटी से प्राप्त मात्र 100 डॉलर थे। उन्होंने इनसे कुछ करने की इच्छा की । हजारों दरवाजे खटखटाए, तब उन्हें पहला खरीददार मिला। असफलता के इस दौर में वे कभी निराश व हताश नहीं हुए। इसी के परिणामस्वरूप आज केंटुकी, फ्रायड चिकन के नाम से विख्यात है।

युवा कार्टूनिस्ट वाल्ड डिस्नी के कार्टूनों को अत्यंत निम्नस्तरीय माना जाता था। वे हिम्मत नहीं हारे और उन्होंने अंततः मिनी हाउस की परिकल्पना की। महान् वैज्ञानिक थामस एडीसन के जीवन में भी हजारों बार असफलता का अंतहीन दौर आया था, परंतु इसके आगे उनने घुटने नहीं टेके। संसार को रोशनी देने वाली बिजली का बल्ब उन्हीं के आविष्कार का नतीजा है।

सफल व्यक्ति छोटे-छोटे कार्यों को ही कुशलता एवं धैर्यपूर्वक करते हैं। वे किसी महान् कार्य के इंतजार में नहीं बैठे रहते। हेनरी फोर्ड ने जो पहली कार बनाई थी, उसमें ‘रिवर्स गेयर’ डालना ही भूल गए थे। फिर वे चालीस साल की उम्र में दीवालिया हो गए थे। उन्होंने सफलता पाने के लिए अथक् परिश्रम एवं धैर्य को बनाए रखा और उसे पाया। युवा बीथोवन से कहा गया था कि उसमें संगीत की प्रतिभा नहीं है। उन्हीं बीथोवन ने संगीत की सर्वोत्कृष्ट रचनाएँ करके संसार को आश्चर्यचकित कर दिया।

जीवन में असफलताएँ तो सच्ची सहचरी हैं। इनका स्वागत करना चाहिए। ये विनम्रता, संयम और धैर्य की शिक्षा देती हैं। कष्ट-कठिनाइयों में प्राप्त साहस और विश्वास असफलता से जूझने और उबरने में सहायता प्रदान करता है। व्यक्ति को सदैव कठिन परिस्थितियों से ऊपर उठकर जीना व जीतना सीखना चाहिए।

सफल होने के लिए कई गुणों की आवश्यकता पड़ती है। दृढ़ इच्छा शक्ति से सफलता प्राप्त करने की प्रेरणा मिलती है। नैपोलियन हिल का कहना है कि इंसान जो सोच सकता है और जिसमें विश्वास करता, वह उसे प्राप्त भी कर सकता है। प्रतिबद्धता सफलता का आवश्यक गुण है। निष्ठा और बुद्धिमता प्रतिबद्धता बनाने के दो दृढ़ आधार हैं। यहाँ पर निष्ठा का अर्थ है, नुकसान वह क्षति होने पर भी अपना कार्य पूरा करना। बुद्धिमत्ता का तात्पर्य है कि ऐसे गलत कार्य ही न करना।

सफलता के लिए जिम्मेदारी भी होनी चाहिए। सच्चरित्र व्यक्ति जिम्मेदारियों को स्वीकारते हैं। वे अपना फैसला स्वयं करते हैं और अपने जीवन को दिशा भी स्वयं ही देते हैं। सफलता इतनी सहज एवं सरल नहीं है कि यूँ ही अनायास संयोग से मिल जाए। इसके लिए कड़ी मेहनत की जरूरत है। मेहनत अपने आप में प्रारंभ भी है और अंत भी। कठोर मेहनत ही सफलता की कुँजी है। पैराडाइज लास्ट लिखने के लिए मिल्टन प्रतिदिन प्रातः चार बजे उठ जाते थे। उन्होंने वर्षों तक यह परिश्रम किया। नोहा वैबस्टर को वैबस्टर डिक्शनरी का संकलन करने में छत्तीस वर्ष लगे। चार्ल्स डार्विन ने अपनी प्रख्यात कृति ‘ओरिजीन ऑफ स्पिशीज’ बीस वर्ष के कठोर परिश्रम के बाद पूर्ण की थी।

चरित्र सफलता का अपरिहार्य गुण है। चरित्र व्यक्ति के नैतिक मूल्यों, विश्वासों और शख्सियत से मिलकर बनता है। जॉर्ज वाशिंगटन कहते हैं, मैं उम्मीद करता हूँ कि मुझमें सदैव इतनी दृढ़ता और चारित्रिक गुण हों कि मैं एक ईमानदार व्यक्ति के रूप में जाना जा सकूँ। यह मेरे संसार के किसी भी महत्त्वपूर्ण पद-प्रतिष्ठा से बढ़कर है। चिंतन की उत्कृष्टता सफलता का एक अंग है। सही सोच क्षमताओं का भरपूर उपयोग करने में सहायक होती है। सच्चा विश्वास इसी सोच से कई गुना बढ़कर है। सच्चा विश्वास आत्मविश्वासी होने का दृष्टिकोण है। यह व्यापक तैयारियों से ही उपलब्ध होता है।

सच्ची सफलता के लिए शर्त है कि जितना पाएँ उससे अधिक प्रदान करें। देने वाले का कोई प्रतियोगी नहीं होता। वह स्वयं ही प्रतियोगी बन जाता है। इससे ईर्ष्या-द्वेष का भाव नहीं पनपता और न ही उसके बढ़ते कदमों का कोई प्रतिकार करता है। यह गुण किसी भी डिग्री से कहीं ज्यादा महत्त्वपूर्ण है। इसके अलावा साहस का संबल, प्रभु समर्पित कर्म, सतत जिज्ञासु प्रवृत्ति सफलता के सूत्र हैं। इन सूत्रों द्वारा व्यक्ति सफलता का दरवाजा खटखटा सकता है एवं सफलता के भव्य भवन में प्रवेश कर सकता है।

सफलता के कुछ मुख्य उपाय हैं, जिंदगी जीने के लिए है हार के लिए नहीं, सदैव दूसरों की गलतियों से सीखना, चरित्रवान् व्यक्तियों के साथ संबंध बनाना, पाने की अपेक्षा देने की सोचना, बिना कुछ दिए कभी पाने का प्रयास नहीं करना। दूरगामी सोच, विवेक एवं साहस के साथ कदम बढ़ाना और बढ़ाकर कभी वापस न लेना - सफलता का सूत्र है। सफलता प्राप्ति के इच्छुक व्यक्ति को अपनी ईमानदारी के साथ कभी भी समझौता नहीं करना चाहिए।


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