बिलकुल संकोच नही (Kahani)

October 1985

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मध्य रात्रि में गहरी नींद सोते हुए नेपोलियन को सेनापति ने जगाया और दक्षिण मोर्चे पर शत्रु के अचानक आक्रमण का विवरण सुनाते हुए, क्या उपाय अपनाया जाय, इसका निर्देश पूछा। नेपोलियन आँख मलते हुए उठे और दीवार पर टँगे 34 नम्बर नक्शे को उतारते हुए कहा- ‘इसमें बताये हुए तरीके का अवलम्बन करो।’

सेनापति चकित था, कि जिसका उसे अनुमान तक न था, उस संभावना को नेपोलियन ने समय से पूर्व ही कैसे सोच लिया और कैसे उसका प्रतिकार खोज लिया।

असमंजस तोड़ते हुए नेपोलियन ने कहा- ‘विचारशील अच्छी से अच्छी आशा करते हैं, किन्तु बुरी से बुरी परिस्थितियों के लिये तैयार रहते हैं। मेरी मनःस्थिति सदा से ऐसी ही रही है। इसलिये विपत्ति टूटने से पहले भी उसका अनुमान लगाने और उपाय सोचने में मुझे संकोच नहीं होता।


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