ईसा की विदाई (Kahani)

January 1988

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ईसा की विदाई का अन्तिम दिन था। उस रात उन्होंने अपने प्रमुख शिष्यों को बुलाया और सभी के पैर धोए।

शिष्यों ने इस पर आश्चर्य किया तो वे बोले- “जो तुम्हें पूजें उनके प्रति तुम भी पूज्य भाव रखना। क्योंकि वे ही तुम्हें श्रेय प्रदान करते हैं। ऐसा न हो कि सम्मान पाकर इतराओ और अहंकार के दबाव में अपनी श्रद्धा गँवा बैठो”।


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