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January 1963

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न स्फूर्जति न च गर्जति न च करकाः किरति सृजति न च तडितः। न च विनि मुञ्चति वात्याँ, वर्षति निभृतं महामेघः

महामेघ (झर बादल, न भड़कते हैं, न गरजते हैं, और ओले फेंकते हैं, न बिजली कौंधाते हैं, न तूफान घहराते हैं, वे चुप चाप बरसते रहते हैं।

प्रविष्ट कराने के लिए कार्य करेंगे। भौतिक और आत्मिक दोनों ही दृष्टियों से सबल बना हुआ राष्ट्र सच्चे अर्थों में बलवान कहा जा सकता है और वही इस योग्य बन सकता है कि किसी भी दुर्दान्त दुष्ट के आक्रमणकारी इरादों को धूलि में मिला सके।

व्यक्ति निर्माण का, चरित्र निर्माण का, समाज निर्माण का, युग निर्माण का कार्यक्रम युद्ध मोर्चे की सफलता के लिए ही है। उसे रक्षा प्रयत्न का ही एक अंग मानकर चला जायगा। अज्ञातवास से लौटने के बाद 10 वर्ष का हमारा कार्यक्रम इसी दृष्टि से बना है। शेष 8॥ वर्ष इसी मोर्चे पर लड़ना है। परिवार के प्रत्येक स्वजन को इस मोर्चे पर हमारे साथ रहना चाहिये।


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