सूर्य चिकित्सा विज्ञान

भूमिका

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स्वस्थता की स्थिरता, वृद्धि एवं रोग-निवारण के लिए सूर्य-किरणों से बढ़कर कोई तत्व इस पृथ्वी पर नहीं है। यह प्राचीन और आधुनिक दोनों ही चिकित्सा विज्ञान द्वारा एक स्वर से स्वीकार किया जाता है। यदि मनुष्य सूर्य किरणों का समुचित सेवन करे तो वह अपनी आरोग्यता को सुरक्षित रख सकता है।

इस पुस्तक में सूर्य-किरणों की महत्ता बताई है और सूर्य-सेवन से स्वस्थ रहने पर जोर दिया गया है। साथ ही क्रोमोपैथिक साइंस के आधार पर रंगीन कांचों की सहायता से किरणों में से आवश्यक रंगों का प्रभाव लेकर, उनके द्वारा रोग-निवारण की विधि बताई गई है। इस चिकित्सा विधि से योरोप तथा अमरीका में विगत पचास वर्षों से चिकित्सा हो रही है। वहां इस चिकित्सा विज्ञान में असाधारण सफलता प्राप्त हुई है।

अब इसका प्रचार भारतवर्ष में भी हुआ है। जहां-जहां इस पद्धति के अनुसार चिकित्सा की गई है, आशाजनक लाभ हुआ है। सूर्य-चिकित्सा विधि हमारे अपने अनुभव के अनुसार भी बहुत लाभदायक सिद्ध हुई है। खर्च की दृष्टि से तो यह सबसे सस्ती है। भारत जैसे गरीब देश के लिए तो यह बहुत ही उपयोगी है। वे परमार्थी लोग जो पीड़ितों के रोग निवारण के इच्छुक हैं, किंतु अर्थाभाव के कारण अपने विचारों को कार्य रूप में परिणत नहीं कर पाते, उनके लिए यह चिकित्सा विधि बहुत ही उपयोग है। हमारा विश्वास है कि जनता के आरोग्य संवर्धन तथा संरक्षण में यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी।
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