यजुर्वेद भाग-2


हे जल समूह ! आप सूर्य की कान्ति से उत्पन्न है, स्वयं प्रकाशित होकर सबको तेज प्रदान करने वाले है। आप राष्ट्र प्रदान करने में समर्थ है,
 हमें राष्ट्र प्रदान करे । आप सूर्य के समान तेजस्वी है, (अतः प्रभाव में ) सूर्य के समान ही है,
आप राष्ट्र प्रदान करने वाले है, इसलिए हमें राष्ट्र प्रदान करे।  इसके लिए यह आहुति समर्पित है। 
आप मनुष्यो को आनंद देने वाले होकर राष्ट्र प्रदान करने में  समर्थ है, इसलिए उस सुखदाता व्यक्ति को राष्ट्र प्रदान करे,इसके लिए यह आहुति समर्पित है। 

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