दुनिया नष्ट नहीं होगी, श्रेष्ठतर बनेगी

युगऋषि की भविष्यवाणी सतयुग की वापसी आसुरी प्रपंच- पुरातन काल में एक अपराजित-हेय-दुर्दान्त दैत्य कृतवीर्य के आतंक से दसों दिशाओं में हाहाकार मच गया था । वह महाप्रतापी और वरदानी था । देवता और मनुष्यों में से कोई उससे लोहा ले सकने की स्थिति में नहीं था । सभी असहाय बने जहाँ-तहाँ अपनी जान बचाते-फिरते थे । उपाय ब्रह्माजी ने सोचा । भगवान् शंकर को एक प्रतापी पुत्र उत्पन्न करने के लिए सहमत किया । वही इस प्रलय दूत से लड़ सकता था । कार्तिकेय (स्वामी कार्तिक) जन्मे । अग्नि ने उन्हें गर्भ में रखा । कृतिकाओं ने पाला और इस योग्य बनाया कि वह अकेला ही चुनौती देकर कृतवीर्य को परास्त कर सके । ऐसा ही हुआ भी और संकट टलने का सुयोग आया था । इस पौराणिक उपाख्यान में कितना सत्य और कितना अलंकार है यह कहना कठिन है; पर प्रस्तुत विभीषिकाएँ सचमुच ही ऐसी हैं, जिन्हें कृतवीर्य के आतंक तुल्य ठहराया जा सके । जो सामने हैं, उनकी परिणति महाप्रलय होने जैसी मान्यता हर विचारशील की बनती जा रही है । अणु युद्ध की विभीषिका किसी भी दिन साकार हो सकती है और इस धरती पर विषाक्तता के अतिरिक्त और कुछ बचने के आसार नहीं हैं । बढ़ती जनसंख्या के

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