अनादि गुरुमंत्र गायत्री

अनादि गुसमंत्र गायत्री मनुष्य में अन्य प्राणियों की अपेक्षा जहाँ कितनी ही विशेषताएँ हैं वहाँ कितनी ही कमियाँ भी हैं । एक सबसे बड़ी कमी यह है कि पशु-पक्षियों के बच्चे बिना किसी के सिखाए अपनी जीवनचर्या की बातें अपने आप सीख जाते हैं पर मनुष्य का बालक ऐसा नहीं करता है । यदि उसका शिक्षण दूसरों के द्वारा न हो तो वह उन विशेषताओं को प्राप्त नहीं कर सकता जो मनुष्य में होती हैं । धर्म, संस्कृति, रिवाज, भाषा, वेशभूषा, शिष्टाचार, आहार, विहार आदि बातें अपने निकटवर्ती लोगों से सीखता है । यदि कोई बालक जन्म से ही अकेला रखा जाए तो वह सब बातों से वंचित रह जाएगा जो मनुष्य में होती हैं । पशु-पक्षियों के बच्चों में यह बात नहीं है । बया पक्षी का छोटा बच्चा पकड़ लिया जाए और वह माँ-बाप से कुछ न सीखे तो भी बड़ा होकर अपने लिए वैसा ही सुंदर घोंसला बना लेगा जैसा अन्य बया पक्षी बनाते हैं । पर अकेला रहने वाला मनुष्य का बालक भाषा, कृषि, शिल्प, संस्कृति, धर्म, शिष्टाचार, लोक-व्यवहार, श्रम, उत्पादन आदि सभी बातों से वंचित रह जाएगा । पशुओं के बालक जन्मते ही चलने-फिरने लगते हैं और माता का पयपान करने लगते हैं पर मनुष्य का बालक बहुत दिन में कुछ समझ पाता है । आरंभ में तो वह करवट बदलना, दूध का स्थान तलाश करना तक नहीं जानता, अपनी माता तक को नहीं पहचानता । इन बातों में पशुओं के बच्चे अधिक चतुर होते हैं । मनुष्य की यह कमजोरी कि वह दूसरों से ही सब कुछ सीखता है, उसके उच्च विकास में बाधक होती है । कारण कि साधारण वातावरण में भले तत्वों की अपेक्षा बुरे तत्व अधिक होते हैं । उन बुरे

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