युग धर्म पर्यावरण संरक्षण

पर्यावरण का संरक्षण मनुष्यजाति के लिए एक युग धर्म के समान है। जैसे जैसे-इस विधा पर गहन अनुसधान होता चला आ रहा है, सभी इस निष्कर्ष पर पहुँच रहे हैं कि पर्यावरण मात्र स्थूल प्रकृति तक सीमित नहीं है। "डीप इकॉलाजी" के प्रवर्तकों ने अब ऐसी धारणाएँ व्यक्त की हैं व सटीक वैज्ञानिक प्रतिपादन प्रस्तुत किए हैं, जिनसे ज्ञात होता है कि यह प्रकृति समग्र इकोसिस्टम के रूप में एक विराट हृदय के समान धड़कती है-श्वास भी लेती है । समष्टि में व्यष्टिए रूपी घटक की तरह हम भी उसके अंग हैं । यदि चैतन्यता के स्तर पर यह गहरा चिंतन किया जाए तो प्रकृति को पहुँचाई गई थोडी भी क्षति हमें-हमारे भविष्य की पीढ़ी के अंग-प्रत्यंगो को पहुँचाई गई क्षति है । सुप्रसिद्ध पुस्तक "वेब ऑफ लाइफ" में फिट्जॉफ काप्रा जैसे नोबुल पुरस्कार प्राप्त भौतिकविद् ने बड़ा विस्तृत वर्णेन कर, मानवीय हृदय को-भाव संवेदनाओं को प्रकृति-पर्यावरण के साथ जोड़ उनका अविच्छिन्न संबंध स्थापित किया है ।

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