महापुरुषों के अविस्मरणीय जीवन प्रसंग-1/5

वाड्मय के इस खंड में महापुरुषों के उन अविस्मरणीय जीवन प्रसंगों को लिया गया है, जिनसे अनेकों ने राह पाई है एवं जो आज भी प्रासंगिक हैं । भगवान परशुराम, महात्मा बुद्ध, कुमारजीव, सम्राट अशोक, ईसा, महावीर, संत सुकरात, कन्फ्युशियस, महात्मा जरथुस्त्र, अरस्तु, महर्षि पाणिनि, चाणक्य, शंकराचार्य एवं रामकृष्ण परमहंस जैसे महापुरुषों के जीवन प्रसंगों द्वारा इस खंड में आचरण को ऊँचा उठाने और जीवन के रोजमर्रा की समस्याओं को सुलझाने वाले ऐसे प्रसंग वर्णित हैं जो प्रेरणादाई हैं और सही अर्थो में व्यक्ति की अंतश्चेतना को दिशा देने वाले हैं, इनके विषय में कहा गया है कि "देखन में छोटे लगें, घाव करें गंभीर" अर्थात ये मर्मस्थल को स्पर्श करते हुए जीवन की राह को बदल देते हैं । अगले अध्याय में धार्मिक चेतना के उन्नायक ऐसे संत-महात्माओं की जीवनियों के हृदयस्पर्शी प्रसंग वर्णित हैं, जो भारत में जन्मी हमारी संस्कृति के प्राणतत्त्व हैं । संत रैदास, तुकाराम, चैतन्य, नामदेव, ज्ञानेश्वर, स्वामी विवेकानंद, पौहारी बाबा, मत्स्य्रेंद्रनाथ, श्रीअरविंद, महर्षि रमण, स्वामी रामतीर्थ, गुरुनानक एवं अन्य सभी सिख धर्म के गुरु, संत कबीर, राघवेंद्र स्वामी, स्वामी विरजानंद, मलूकदास, रामानुजाचार्य, संत वसवेश्वर, दादू एवं एकनाथ जैसे भारतीय संस्कृति के मील के पत्थर कहे जाने वाले उच्चतम स्तर तक चेतना को पहुँचाकर जन-जन को ईश्वर प्राप्ति का राजमार्ग दिखाने वाले संत-महात्माओं के अविस्मरणीय प्रसंग इसमें हैं ।

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