बच्चों के शासक नहीं सहयोगी बनें

अभिभावकों खासकर माता-पिता के ऊपर बच्चों में अच्छी आदतें डालने उन्हें सुयोग्य बनाने का महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व है और सभी माँ-बाप यह चाहते भी हैं कि उनके बच्चे योग्य बनें । किंतु बच्चों का निर्माण एक पेचीदा प्रश्न है । इसके लिए अमिभावकों में काफी विचारशीलता विवेक संजीदगी एवं मनोवैज्ञानिक जानकारी का होना आवश्यक है । बहुत से मा-बाप तो बच्चों को पैदा करने, खिलाने-पिलाने, स्कूल आदि में पढ़ने की व्यवस्था तक ही अपने उत्तरदायित्व की इतिश्री समझते हैं किंतु इससे बच्चों के निर्माण की संपूर्ण समस्या का हल नहीं होता हालांकि बच्चों के विकास में इनका भी अपना स्थान है । बच्चों में अच्छी आदतें डालना उनमें सद्गुणों की वृद्धि करके सुयोग्य बनाना एक महत्वपूर्ण बात है । यह असुरता से देवत्व उत्पन्न करने पशुत्व को मनुष्यता में बदलने की प्रक्रिया है एक सूक्ष्म विज्ञान है । बच्चों को प्यार करना खिलाना, पिलाना, उसका संरक्षण करना तो पशुओं गें भी पाया जाता है । बच्चों में बढ़ती हुई उच्छृंखलता, अनुशासनहीनता, स्वेच्छाचार एवं अन्य बुराइयों की जिम्मेदारी बहुत कुछ मां-बाप अमिभावकों के ऊपर ही होती है । उनकी सामान्य-सी गलतियों व्यवहार की छोटी-सी भूलों के कारण बच्चों में बड़ी-बड़ी बुराइयां पैदा हो जाती हैं । अनेक बुरी आदतें बच्चों में पड़ जाती हैं । स्वयं मां-बाप जिसे सुधार समझते हैं वही बात बच्चों के बिगाड़ने का कारण बन जाती है ।

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