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भगवान् पात्रता के क्षीर सागर में विराजते हैं
एक नारी की निश्छल साधना
जप के साथ ध्यान, यही है साधना का महाविज्ञान
स्वप्नों के झरोखे से अन्तर्जगत का अवलोकन
देवाधि देव आत्मदेव को ही साधें
भोगी नहीं र्ऊध्वरेता बनें
चरित्र रक्षा से बढ़कर कोई सिद्धि नहीं
तुच्छता को त्यागें, महानता का वरण करें
सारा जगत् ही शब्दमय है
सिद्धियों का भाण्डागार है मानवी अन्तराल
जरा जगाकर तो देखिये मस्तिष्क की प्रसुप्त परतों को
कारण शरीर की कर्णेन्दि्रय साधना
बुद्धि का अपच
मंत्रों में निहित शक्ति एवं उसकी जागृति
विज्ञान नकारे तो भी सत्य तो सत्य ही है
अवतार की पहचान
सामूहिक प्रार्थना के चमत्कारी सत्परिणाम
परम पूज्य गुरुदेव की अमृतवाणी
जो मिला वह वस्तुतः खरीद गया (पूज्यवर की लेखनी से विशेष लेख)
पुन:प्रकाशित विशेष लेखमाला-४, अपने अंग अवयवों से
गायत्री मंत्र और वाक् शक्ति
अपनों से अपनी बात, पुनर्गठन की वेला में अब आ पहुँचा प्रथम पूर्णाहुति पर्व
वेदों के उद्धार हेतु प्राणवान परिजन आगे आयें
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भगवान् पात्रता के क्षीर सागर में विराजते हैं
एक नारी की निश्छल साधना
जप के साथ ध्यान, यही है साधना का महाविज्ञान
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Magazine
-
Year 1995 - Version 1
Media: SCAN
Language: HINDI
SCAN
TEXT
भगवान् पात्रता के क्षीर सागर में विराजते हैं
2
Last
2
Last
Other Version of this book
Version 1
Type: SCAN
Language: HINDI
...
October 1995
Type: TEXT
Language: HINDI
...
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एक नारी की निश्छल साधना
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