संगीत सौरभ

संगीत के माध्यम से जन- जागरण, दुष्प्रवृति उन्मूलन, सत्प्रवृति संवर्धन संवर्धन जैसे अभियानों को गतिशील बनाने के लिए बड़ी संख्या मे युग गायक तैयार करने की दृष्टि से संगीत सौरभ के भाग १ और २ प्रकाशित किये जा चुके है । भषण की अपेक्षा संगीत का प्रभाव जनमानस पर अधिक सुगमता से होता देखा गया है । पुज्य गुरुदेव (युऋषि, वेदमूर्ति, तपोनिष्ठ पं० श्रीराम शर्मा आचार्य) ने एक बार कार्यकर्त्ताओ को यह तथ्य अनेक ढंग से समझाने का प्रयास किया है। एक बार कहने लगे भाषण के माध्यम से अपनी बात पहुँचानी हो, तो तमाम शर्ते बीच मे आती है। बात भले ही बडी उपयोगी और प्रमाणिक हो ; लेकिन उसे प्रस्तुत करने के लिए वक्ता का अभ्यास और उसकी प्रतिष्ठा भी जरुरी है।

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