मानव जीवन : एक बहुमूल्य उपहार

जो स्वयं बदल सकेगा वही युग को बदलने की भूमिका भी संपादित करेगा जो स्वयं कीचड़ में डूबा हुआ खडा है वह किसी अन्य को स्वच्छ कैसे करेगा ? यदि हमने अपने को नहीं बदला और दूसरों को उपदेश करने का पाण्डित्य दिखाना जारी रखा तो यह एक उपहासास्पद विडंबना होगी अपनी गतिविधियाँ सुधारें और संसार हित नियोजित करें तो सत्परिणाम निश्चित रूप से सामने आएगा ।

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