ईक्कीसवी सदी के लिए हमें क्या करना होगा ?

लंबी मंजिल लगातार चलकर पार नहीं की जाती । बीच में सुस्ताने के लिए विराम भी देना पड़ता है । रेलगाड़ी जंक्शन पर खड़ी होती है । पुराने मुसाफिर और असबाब उतारे जाते हैं । नए चढ़ाए जाते हैं । ईंधन भरने और सफाई करने की भी आवश्यकता पडती है । आर्थिक वर्ष पर पुराना हिसाब-किताब जाँचा जाता है औंर नया बजट बनता है । भ्रूण माता के गर्भ में रहकर अंग-प्रत्यंगों को इस योग्य बना लेता है कि शेष जीवन उसके बाद काम में लगाया जा सके । किसान हर साल नई फसल बोने और काटने का क्रम जारी रखता है । ये सब कृत्य लगातार नहीं होते, बीच में विराम के क्रम भी चलते रहते हैं । फौजियों की टुकड़ी भी कूच के समय में बीच-बीच में सुस्ताती है । ब्रह्मकमल की एक फुलवारी अस्सी वर्ष तक हर साल एक नया पुष्प खिलाने की तरह अपनी मंजिल का एक विराम निर्धारण पूरा कर चुकी । अब नई योजना के अनुरूप नयी शक्ति संग्रह करके नया प्रयास आरंभ किया जाना है । यह विराम प्रत्यावर्तन लगभग वैसा ही है, जैसे वयोवृद्ध शरीर को त्यागकर नए शिशु के रूप में नया जन्म लिया जाता है और नए नाम से संबोधन किया जाता है । सभी को तो नहीं पर साथ में जुड़े हुए लोगों को इसका संकेत था । इसलिए उन्हें भूतकाल के आश्चर्यजनक रहस्यों और भविष्य के अभूतपूर्व निर्धारणों के संबंध में अधिक कुछ जानने की उत्सुकता एवं जिज्ञासा उभरी ।

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