आप अपने आपको पहचान लीजिये ....

भाइयों कई बार बड़े- बड़ों से गलती हो जाती है। लोग नफे को नुकसान समझ लेते हैं नुकसान को नफा समझ लेते हैं। लाटरी का नंबर यदि मैं आपसे बता दूँ कि फलाना नंबर खुलेगा और आपसे दो रुपये माँगूँ कि आप दो रुपये जमा कीजिये लाटरी का टिकट खरीदने के लिये तो आपको क्या लगेगा नुकसान लगेगा। जाने मिलेगा कि नहीं मिलेगा और मिल जाये तो तो तो फिर आपको नफा मालूम पड़ेगा इसी तरीके से बहुत सी बातें ढेरों की ढेरों जिंदगी में ऐसी है जिसे कि आदमी नुकसान समझता है पर उसमें नफा होता है। नफा होता है और वह नुकसान समझता है। शेर का छोटा सा बच्चा भेड़ों के साथ में था शेर एक आ गया और उसने कहा तू तो मेरे साथ चल तू कहाँ भेड़ों में पड़ा है तो उसको बुरा लगा कि न जाने यह कौन है और मुझे कहाँ ले जा रहा है और जिनके साथ में हमेशा से रहा था उनसे मुझे छुड़ा रहा है यह मुझे बहुत गलत सलाह दे रहा है। लेकिन जब पानी में उसकी शकल दिखाई और उसको समझ में गया कि मैं शेर हूँ तो वह नफे में रहा नहीं तो सारी जिंदगी उसे भेड़ों की तरीके से रहना पड़ता। और गंदी जिंदगी जिया होता। लेकिन उस समय तो उसे नुकसान लगा होगा। बाद में फायदा लगा होगा। बीज बोया जाता है जमीन में तो यह मालूम पड़ता है कि नुकसान हो गया। बीज चला गया। बीज कितने दाम का आता है महँगा आता है आजकल लेकिन बीज नुकसान हो गया लेकिन जब उसकी फसल तैयार होकर आती है कोठे और कुठीले भर जाते हैं तब मालूम पड़ता है कि नहीं गलती नहीं हुई थी यह ठीक सलाह दी गई थी हमको। हमको बीज बोने की सलाह देकर हमारा बीज छीना नहीं गया था नुकसान की तरफ ढकेल नहीं दिया गया था।

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