मनोविकार सर्वनाशी शत्रु

आप जान बुजकरअमूल्य मानव जीवन को नष्ट कर देना चाहते है जो असफलता आ चुकी है ,जो हाथ से चला गया उसके लिए रोने कलपने अथवा हाय -हाय करने से भूतकाल वर्तमान में आकर आपको सांत्वना नही दे सकता |इसके लिए आपको भविष्य की संभावनाओ की और ही देखना होगौसके लिए आत्म विश्वाश के साथ पुरषार्थ करना होगा अन्यथा मनोविकारो के सर्वनाशी महाशत्रु आपकी सुख - शांति सब छीन लेंगें   

जब संसार में सभी साथी मनुष्य का साथ छोड़  दे ,पराजय और पीड़ाओ के दंश मनुष्य को घायल कर दे , पेंरो के निचे से सभी आधार खिसक जाये जीवन के अंधकारयुक्त बीहड़ पथ पर यात्री अकेला पड़ जाए तो भी क्या वह जीवित रह सकता है ?

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