गायत्री की अनुष्ठान एवं पुरश्चरण साधनाएँ

अनुष्ठान -गायत्री उपासना के उच्च सोपान' एक नागरिक प्रश्न करता है आर्य ।। वह कौनसी उपासना है' जिससे जिससे जातीय जीवन पौरवान्वित होता हैं ? इस पर गोपथ 'के ब्राह्मण के उतर दिया- 'तेजो वै गायत्री छन्दसा तेजो रथन्तरम् साम्नाम् तेजश्चतुविशस्तो माना तेज '' एवं तत्सम्पक दधाति, पुत्रस्य पुत्रस्तेजस्वी भवति '' गोपथ ब्राह्मण हे तोत्! समस्त '' वेदों का तेज गायत्री है सामवेद का छन्द ही २४ स्तम्भों का, वह दिव्य तेज़, है जिसे धारण करने वालों की वंश परम्परा तेजस्वी होती है, हिन्दुओं के लिये अनिवार्य 'सन्ध्यावंदन की प्रक्रिया, वहीं से प्रारम्भ होतीं है '' इस 'ब्रह्म तेज को धारण करने वाली हिन्दु जाति को शौर्य साहस और स्वाभिमान की दृष्टि से कोई परास्त नहीं कर सका ।। यहाँ का कर्मयोग विख्यात, है ।। यहाँ के पारिवारिक जीवन का

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