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April 1963

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विपदि धैर्यमथाम्युदये क्षमा

सदसि वाक्पटुता युधि विक्रम

यशसि चाभिरुचिर्व्यसनं श्रुतौ

प्रकृति सिद्ध मिदं हि महात्मनाम्॥

—हितोपदेश

“महान पुरुषों में ये गुण स्वभावतः पाये जाते हैं—विपत्ति में धैर्य, अभ्युदय के अवसर पर क्षमा, सभा में भाषण-कुशलता, युद्ध में विक्रम, यश में रुचि और शास्त्र अध्ययन की लगन।”

इन तथ्यों को हमें भली-भाँति समझना चाहिए और धर्म-कर्तव्य की दृष्टि से, जीवन को सफल बनाने की दृष्टि से, युग-निर्माण की दृष्टि से सद्विचारों के प्रचार की पुण्य प्रक्रिया को अपने और दूसरों की


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